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श्रीमद्भागवत महापुराणम् By समाजसेवी वनिता कासनियां पंजाब〰️〰️🌸〰️〰️🌸〰️〰️षष्ठः स्कन्धः अथ षष्ठोऽध्यायःदक्षप्रजापति की साठ कन्याओं के वशं का विवरण...(भाग 2)〰️〰️🌸〰️〰️🌸〰️〰️🌸〰️〰️🌸〰️〰️🌸〰️〰️सङ्कल्पायाश्च सङ्कल्पः कामः सङ्कल्पजः स्मृतः ।वसवोऽष्टौ वसोः पुत्रास्तेषां नामानि मे शृणु ॥ १०द्रोणः प्राणो ध्रुवोऽर्कोऽग्निर्दोषो वसुर्विभावसुः । द्रोणस्याभिमते: ₹पल्या हर्षशोकभयादयः ॥ ११प्राणस्योर्जस्वती भार्या सह आयुः पुरोजवः । ध्रुवस्य भार्या धरणिरसूत विविधाः पुरः ॥ १२अर्कस्य वासना भार्या पुत्रास्तर्षादयः स्मृताः । अग्नेर्भार्या वसोर्धारा पुत्रा द्रविणकादयः ॥ १३स्कन्दश्च कृत्तिकापुत्रो ये विशाखादयस्ततः ।दोषस्य शर्वरीपुत्रः शिशुमारो हरेः कला ॥ १४वसोराङ्गिरसीपुत्रो विश्वकर्माकृतीपतिः । ततो मनुश्चाक्षुषोऽभूद् विश्वे साध्या मनोः सुताः ॥ १५विभावसोरसूतोषा व्युष्टं रोचिषमातपम् । पञ्चयामोऽथ भूतानि येन जाग्रति कर्मसु ॥ १६सरूपासूत' भूतस्य भार्या रुद्रांश्च कोटिशः ।ला रैवतोऽजो भवो भीमो वाम उग्रो वृषाकपिः ॥ १७अजैकपादहिर्बुध्न्यो बहुरूपो महानिति । रुद्रस्य पार्षदाश्चान्ये घोरा भूतविनायकाः ।। १८श्लोकार्थ〰️〰️〰️ सङ्कल्पा का पुत्र हुआ सङ्कल्प और उसका काम। वसु के पुत्र आठों वसु हुए। उनके नाम मुझसे सुनो ॥ १० ॥ द्रोण, प्राण, ध्रुव, अर्क, अग्नि, दोष, वसु और विभावसु । द्रोण की पत्नी का नाम है अभिमति । उससे हर्ष, शोक, भय आदि के अभिमानी देवता उत्पन्न हुए ॥ ११ ॥ प्राण की पत्नी ऊर्जस्वती के गर्भ से सह, आयु और पुरोजव नाम के तीन पुत्र हुए। धुव की पत्नी धरणी ने अनेक नगरों के अभिमानी देवता उत्पन्न किये ॥ १२ ॥ अर्क की पत्नी वासना के गर्भ से तर्ष (तृष्णा) आदि पुत्र हुए। अग्नि नामक वसु की पत्नी धारा के गर्भ से द्रविणक आदि बहुत-से पुत्र उत्पन्न हुए ॥ १३ ॥ कृत्तिका पुत्र स्कन्द भी अग्नि से ही उत्पन्न हुए। उनसे विशाख आदि का जन्म हुआ। दोष की पत्नी शर्वरी के गर्भ से शिशुमार का जन्म हुआ। वह भगवान्‌ का कलावतार है ॥ १४ ॥ वसु की पत्नी आङ्गिरसी से शिल्पकला के अधिपति विश्वकर्माजी हुए। विश्वकर्मा के उनकी भार्या कृती के गर्भ से चाक्षुष मनु हुए और उनके पुत्र विश्वेदेव एवं साध्यगण हुए ॥ १५ ॥ विभावसु की पत्नी उषा से तीन पुत्र हुए- व्युष्ट, रोचिष् और आतप। उनमें से आतप के पञ्चयाम (दिवस) नामक पुत्र हुआ, उसी के कारण सब जीव अपने-अपने कार्यों में लगे रहते हैं ॥ १६ ॥भूत की पत्नी दक्षनन्दिनी सरूपा ने कोटि-कोटि रुद्रगण उत्पन्न किये। इनमें रैवत, अज, भव, भीम, वाम, उग्र, वृषाकपि, अजैकपाद, अहिर्बुध्न्य, बहुरूप, और महान्— ये ग्यारह मुख्य हैं। भूत की दूसरी पत्नी भूता से भयङ्कर भूत और विनायकादि का जन्म हुआ। ये सब ग्यारह वें प्रधान रुद्र महान् के पार्षद हुए ॥ १७-१८ ॥बाल वनिता महिला आश्रमक्रमशः...शेष अलगे लेख में...〰️〰️🌸〰️〰️🌸〰️〰️🌸〰️〰️🌸〰️〰️🌸〰️〰️

श्रीमद्भागवत महापुराणम्  
By समाजसेवी वनिता कासनियां पंजाब
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षष्ठः स्कन्धः अथ षष्ठोऽध्यायः

दक्षप्रजापति की साठ कन्याओं के वशं का विवरण...(भाग 2)
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सङ्कल्पायाश्च सङ्कल्पः कामः सङ्कल्पजः स्मृतः ।
वसवोऽष्टौ वसोः पुत्रास्तेषां नामानि मे शृणु ॥ १०

द्रोणः प्राणो ध्रुवोऽर्कोऽग्निर्दोषो वसुर्विभावसुः । 
द्रोणस्याभिमते: ₹पल्या हर्षशोकभयादयः ॥ ११

प्राणस्योर्जस्वती भार्या सह आयुः पुरोजवः । ध्रुवस्य भार्या धरणिरसूत विविधाः पुरः ॥ १२

अर्कस्य वासना भार्या पुत्रास्तर्षादयः स्मृताः । 
अग्नेर्भार्या वसोर्धारा पुत्रा द्रविणकादयः ॥ १३

स्कन्दश्च कृत्तिकापुत्रो ये विशाखादयस्ततः ।
दोषस्य शर्वरीपुत्रः शिशुमारो हरेः कला ॥ १४

वसोराङ्गिरसीपुत्रो विश्वकर्माकृतीपतिः । ततो मनुश्चाक्षुषोऽभूद् विश्वे साध्या मनोः सुताः ॥ १५

विभावसोरसूतोषा व्युष्टं रोचिषमातपम् । पञ्चयामोऽथ भूतानि येन जाग्रति कर्मसु ॥ १६

सरूपासूत' भूतस्य भार्या रुद्रांश्च कोटिशः ।ला रैवतोऽजो भवो भीमो वाम उग्रो वृषाकपिः ॥ १७

अजैकपादहिर्बुध्न्यो बहुरूपो महानिति । रुद्रस्य पार्षदाश्चान्ये घोरा भूतविनायकाः ।। १८

श्लोकार्थ
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सङ्कल्पा का पुत्र हुआ सङ्कल्प और उसका काम। वसु के पुत्र आठों वसु हुए। उनके नाम मुझसे सुनो ॥ १० ॥ 

द्रोण, प्राण, ध्रुव, अर्क, अग्नि, दोष, वसु और विभावसु । द्रोण की पत्नी का नाम है अभिमति । उससे हर्ष, शोक, भय आदि के अभिमानी देवता उत्पन्न हुए ॥ ११ ॥ 

प्राण की पत्नी ऊर्जस्वती के गर्भ से सह, आयु और पुरोजव नाम के तीन पुत्र हुए। धुव की पत्नी धरणी ने अनेक नगरों के अभिमानी देवता उत्पन्न किये ॥ १२ ॥ 

अर्क की पत्नी वासना के गर्भ से तर्ष (तृष्णा) आदि पुत्र हुए। अग्नि नामक वसु की पत्नी धारा के गर्भ से द्रविणक आदि बहुत-से पुत्र उत्पन्न हुए ॥ १३ ॥ 

कृत्तिका पुत्र स्कन्द भी अग्नि से ही उत्पन्न हुए। उनसे विशाख आदि का जन्म हुआ। दोष की पत्नी शर्वरी के गर्भ से शिशुमार का जन्म हुआ। वह भगवान्‌ का कलावतार है ॥ १४ ॥ 

वसु की पत्नी आङ्गिरसी से शिल्पकला के अधिपति विश्वकर्माजी हुए। विश्वकर्मा के उनकी भार्या कृती के गर्भ से चाक्षुष मनु हुए और उनके पुत्र विश्वेदेव एवं साध्यगण हुए ॥ १५ ॥ 

विभावसु की पत्नी उषा से तीन पुत्र हुए- व्युष्ट, रोचिष् और आतप। उनमें से आतप के पञ्चयाम (दिवस) नामक पुत्र हुआ, उसी के कारण सब जीव अपने-अपने कार्यों में लगे रहते हैं ॥ १६ ॥

भूत की पत्नी दक्षनन्दिनी सरूपा ने कोटि-कोटि रुद्रगण उत्पन्न किये। इनमें रैवत, अज, भव, भीम, वाम, उग्र, वृषाकपि, अजैकपाद, अहिर्बुध्न्य, बहुरूप, और महान्— ये ग्यारह मुख्य हैं। भूत की दूसरी पत्नी भूता से भयङ्कर भूत और विनायकादि का जन्म हुआ। ये सब ग्यारह वें प्रधान रुद्र महान् के पार्षद हुए ॥ १७-१८ ॥

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