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ग्रह ठीक ना कर सको तो गृह ठीक करो जिंदगी बदले गीआओ बताती हूं किस तरह जिंदगी की सारी मुश्किलें हल हो जाएंगी, जिंदगी किस तरह से सुख संपदा से गुजरेगी By समाजसेवी वनिता कासनियां पंजाबअगर आपके पास कुंडली नहीं है, अगर आप की कुंडली के ज्यादातर ग्रह पस्त हैं शनि ग्रह अस्त है। बहुत अनुष्ठान करा लिए, सही ज्योतिषाचार्य सही, गुरु या सही साधक नहीं मिला तो उसके बावजूद जिंदगी कैसे अच्छी होगी खुशियां कैसे आएंगी, आगे पढ़ो बताती हूं हमारी कुंडली में 12 खाने हैं पर भौतिक ग्रह 7 और छाया ग्रह 2 तो तीन खाने जो खाली हैं। वह किसके हैं बड़े महत्वपूर्ण और यही तीन खाने ऐसे हैं जो खुद आपके हाथ में हैं, इन तीन खानों में आप खुद ही कृष्ण और खुद ही अर्जुन बन सकते हो, खुद ही पीड़ित और खुद ही ज्योतिष बन सकते हो अपनी जिंदगी को खुद पलट कर रख सकते हो। नौ ग्रहों के 9 खानों के बाद दसवां खाना है दसवें ग्रह का वह है धरती ग्रह है, जिसे हम गिनते नहीं, उसमें आपका आता है कर्म और आपके शरीर में महत्वपूर्ण अंग अंगूठा, हमारा शरीर धरती के 3 मुख्य तत्वों से बना है जिनमें से वायु मिट्टी और पानी बाकी दो तत्व आकाशीय है अग्नि और आकाश हम जब भी ध्यान लगाते हैं खुद को बैलेंस करने के लिए तो जो ग्रह खराब है उसी की उंगली हम अंगूठे पर रखते हैं अंगूठा यानी हमारा धरती तत्व और हमारा यह शरीर उंगलियां यानी अलग-अलग ग्रह की प्रतीक या पंच तत्वों की प्रतीक। जिस तरह का अनबैलेंस जीवन होता है वही उंगली अंगूठे पर रखकर ध्यान लगाया जाता है और उस ग्रह की ताकत, ऊर्जा अंगूठे में ट्रांसफर की जाती है या शरीर में ट्रांसफर की जाती है आइए अब मुख्य बात ग्रह..... जिनकी यादें, साल्ट, पूर्व जन्मों की यादों के अनुसार हमारी प्रवृत्ति के अनुसार हमारे अंदर मिश्रित होते हैं और उन से लिए गए फैसले ही हमारा भविष्य और वर्तमान तय होते हैं। हमारा दसवां खाना पृथ्वी का 11वां खाना हनरे गृह का आज 11वें खाने के बारे बात करते हैं। घर का वास्तु इतना ज्यादा पावरफुल है कि वह सारे ग्रहों को ठीक कर सकता है। उनके बुरे प्रभाव को खत्म कर सकता है और जिंदगी सुख पूर्व कर सकता है। तो किसी भी हालत में अपने घर का वास्तु ठीक कीजिए।घर की ढलान उत्तर पूर्व साइड में रखें, छत की भी और फर्श की भी, यह सबसे मुख्य पार्ट है यह आपके जीवन को बहुत ज्यादा प्रभावित करता है पश्चिम और दक्षिण साइड भारी उत्तर और पूर्व साइड हल्का वायु और धूप उत्तर और पूर्व से आनी चाहिए घर के मुखिया का कमरा नृत्य कोण में घर की अलमारी घर का पैसा सब इसी कोण में रसोई अग्नि कोण में सीढ़ियां दक्षिण साइड में अगर बिटिया की शादी नहीं हो रही तो उसका कमरा वावय कोण में, घर के लोग अपने संप्रदाय अपने धर्म के अनुसार मंत्र का जप रोजाना करें। अपने इष्ट की भक्ति करते रहें। घर के मध्य में वास्तु यंत्र स्थापित होना चाहिए। घर का मध्य खाली होना चाहिए वहां कोई ज्यादा बोझ नहीं होना चाहिए, अगर मंत्र जप करने का समय नहीं है तो ऐसे कई तरह की बेल या छोटे यंत्र आते हैं कि उस पर मंत्र चलता रहता है घर की रसोई ठीक कर ली तो औरतों का जीवन सुखी कर लिया अगर औरतों का जीवन सुखी नहीं है तो घर की रसोई भी ठीक नहीं है। जिनका भी अग्नि कौन बढ़ा हुआ है प्लाट का, उनका व्यापार नहीं चलेगा, नृत्य कोण में दिक्कत है तो समाज में प्रतिष्ठा तथा औलाद को लेकर दिक्कत है ।घर का वास्तु ठीक करने से घर रहने वाले सभी प्राणियों की कुंडली ठीक हो जाती है। ध्यान से भी ग्रह ठीक होते हैं यह अगली पोस्ट में सिर्फ घर का वास्तु ठीक करके मैंने बहुत लोगों की जिंदगी बदल दी है, बीमार रहने वाली औरतों को ठीक किया है।जो वर्षों से ठीक नहीं हो रही थी संतान को लेकर मुश्किल है सिर्फ वास्तु ठीक करने से हो गई धन और पैसे की दिक्कत भी सिर्फ घर के वास्तु को ठीक करने से हो गई। कुछ लोगों की कुंडली ऐसी होती है कि मैं कितनी भी कोशिश कर लूं वह लोग जप अनुष्ठान नही करा पाते हैं ना वह बात मानते हैं उनका बस वास्तु ठीक कर दो फिर सब ठीकबाल वनिता महिला आश्रम

ग्रह ठीक ना कर सको तो गृह ठीक करो जिंदगी बदले गी
आओ बताती हूं किस तरह जिंदगी की सारी मुश्किलें हल हो जाएंगी, जिंदगी किस तरह से सुख संपदा से गुजरेगी 
By समाजसेवी वनिता कासनियां पंजाब
अगर आपके पास कुंडली नहीं है, अगर आप की कुंडली के ज्यादातर ग्रह पस्त हैं शनि ग्रह अस्त है। 
बहुत अनुष्ठान करा लिए, सही ज्योतिषाचार्य सही, गुरु या सही साधक नहीं मिला तो उसके बावजूद जिंदगी कैसे अच्छी होगी 
खुशियां कैसे आएंगी, 
आगे पढ़ो बताती हूं 
हमारी कुंडली में 12 खाने हैं पर भौतिक ग्रह 7 और छाया ग्रह 2 तो तीन खाने जो खाली हैं। वह किसके हैं 
बड़े महत्वपूर्ण और यही तीन खाने ऐसे हैं जो खुद आपके हाथ में हैं, इन तीन खानों में आप खुद ही कृष्ण और खुद ही अर्जुन बन सकते हो, खुद ही पीड़ित और खुद ही ज्योतिष बन सकते हो 
अपनी जिंदगी को खुद पलट कर रख सकते हो। 
नौ ग्रहों के 9 खानों के बाद दसवां खाना है दसवें ग्रह का 
वह है धरती ग्रह है, जिसे हम गिनते नहीं, उसमें आपका आता है कर्म और आपके शरीर में महत्वपूर्ण अंग अंगूठा, 
हमारा शरीर धरती के 3 मुख्य तत्वों से बना है जिनमें से वायु मिट्टी और पानी बाकी दो तत्व आकाशीय है अग्नि और आकाश 
हम जब भी ध्यान लगाते हैं खुद को बैलेंस करने के लिए तो जो ग्रह खराब है उसी की उंगली हम अंगूठे पर रखते हैं अंगूठा यानी हमारा धरती तत्व और हमारा यह शरीर उंगलियां यानी अलग-अलग ग्रह की प्रतीक या पंच तत्वों की प्रतीक। 
जिस तरह का अनबैलेंस जीवन होता है वही उंगली अंगूठे पर रखकर ध्यान लगाया जाता है और उस ग्रह की ताकत, ऊर्जा अंगूठे में ट्रांसफर की जाती है या शरीर में ट्रांसफर की जाती है 
आइए अब मुख्य बात 
ग्रह..... जिनकी यादें, साल्ट, पूर्व जन्मों की यादों के अनुसार हमारी प्रवृत्ति के अनुसार हमारे अंदर मिश्रित होते हैं 
और उन से लिए गए फैसले ही हमारा भविष्य और वर्तमान तय होते हैं। हमारा दसवां खाना पृथ्वी का 
11वां खाना हनरे गृह का 
आज 11वें खाने के बारे बात करते हैं। घर का वास्तु इतना ज्यादा पावरफुल है कि वह सारे ग्रहों को ठीक कर सकता है। 
उनके बुरे प्रभाव को खत्म कर सकता है और जिंदगी सुख पूर्व कर सकता है। तो किसी भी हालत में अपने घर का वास्तु ठीक कीजिए।
घर की ढलान उत्तर पूर्व साइड में रखें, छत की भी और फर्श की भी, यह सबसे मुख्य पार्ट है यह आपके जीवन को बहुत ज्यादा प्रभावित करता है 
पश्चिम और दक्षिण साइड भारी उत्तर और पूर्व साइड हल्का 
वायु और धूप उत्तर और पूर्व से आनी चाहिए 
घर के मुखिया का कमरा नृत्य कोण में घर की अलमारी घर का पैसा सब इसी कोण में 
रसोई अग्नि कोण में सीढ़ियां दक्षिण साइड में 
अगर बिटिया की शादी नहीं हो रही तो उसका कमरा वावय कोण में, घर के लोग अपने संप्रदाय अपने धर्म के अनुसार मंत्र का जप रोजाना करें। अपने इष्ट की भक्ति करते रहें। 
घर के मध्य में वास्तु यंत्र स्थापित होना चाहिए। 
घर का मध्य खाली होना चाहिए वहां कोई ज्यादा बोझ नहीं होना चाहिए, अगर मंत्र जप करने का समय नहीं है तो ऐसे कई तरह की बेल या छोटे यंत्र आते हैं कि उस पर मंत्र चलता रहता है 
घर की रसोई ठीक कर ली तो औरतों का जीवन सुखी कर लिया अगर औरतों का जीवन सुखी नहीं है तो घर की रसोई भी ठीक नहीं है। 
जिनका भी अग्नि कौन बढ़ा हुआ है प्लाट का, 
उनका व्यापार नहीं चलेगा, 
नृत्य कोण में दिक्कत है तो समाज में प्रतिष्ठा तथा औलाद को लेकर दिक्कत है ।
घर का वास्तु ठीक करने से घर रहने वाले सभी प्राणियों की कुंडली ठीक हो जाती है। 
ध्यान से भी ग्रह ठीक होते हैं यह अगली पोस्ट में 
सिर्फ घर का वास्तु ठीक करके मैंने बहुत लोगों की जिंदगी बदल दी है, बीमार रहने वाली औरतों को ठीक किया है।जो वर्षों से ठीक नहीं हो रही थी 
संतान को लेकर मुश्किल है सिर्फ वास्तु ठीक करने से हो गई 
धन और पैसे की दिक्कत भी सिर्फ घर के वास्तु को ठीक करने से हो गई।

 कुछ लोगों की कुंडली ऐसी होती है कि मैं कितनी भी कोशिश कर लूं वह लोग जप अनुष्ठान नही करा पाते हैं 
ना वह बात मानते हैं उनका बस वास्तु ठीक कर दो फिर सब ठीक
बाल वनिता महिला आश्रम

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*****प्रेम विवाह के ज्योतिषीय सिद्धांत |******बाल वनिता महिला आश्रम ज्योतिष में वर्णित प्रेम विवाह के ज्योतिषीय सिद्धांत के द्वारा हम यह जानने में समर्थ होते है कि किसी प्रेमी- प्रेमिका का प्यार विवाह में परिणत होगा या नहीं। वस्तुतः “प्रेमी और प्रेमिका” के मध्य प्रेम की पराकाष्ठा का विवाह में तब्दील होना ही प्रेम विवाह(Love Marriage) है या यूं कहे कि जब लड़का और लड़की में परस्पर प्रेम होता है तदनन्तर जब दोनों एक दूसरे को जीवन साथी के रूप में देखने लगते है और वही प्रेम जब विवाह के रूप में परिणत हो जाता है तो हम उसे प्रेम-विवाह कहते है।प्रेम विवाह हेतु निर्धारित भाव एवं ग्रहवहीं सभी ग्रहो को भी विशेष कारकत्व प्रदान किया गया है। यथा “शुक्र ग्रह” को प्रेम तथा विवाह का कारक माना गया है। स्त्री की कुंडली में “ मगल ग्रह ” प्रेम का कारक माना गया है। ज्योतिषशास्त्र में सभी विषयों के लिए निश्चित भाव निर्धारित किया गया है लग्न, पंचम, सप्तम, नवम, एकादश, तथा द्वादश भाव को प्रेम-विवाह का कारक भाव माना गया है यथा —लग्न भाव — जातक स्वयं।पंचम भाव — प्रेम या प्यार का स्थान।सप्तम भाव — विवाह का भाव।नवम भाव — भाग्य स्थान।एकादश भाव — लाभ स्थान।द्वादश भाव — शय्या सुख का स्थान। ******प्रेम विवाह के ज्योतिषीय सिद्धांत या नियम##पंचम और सप्तम भाव तथा भावेश के साथ सम्बन्ध। पंचम भाव प्रेम का भाव है और सप्तम भाव विवाह का अतः जब पंचम भाव का सम्बन्ध सप्तम भाव भावेश से होता है तब प्रेमी-प्रेमिका वैवाहिक सूत्र में बंधते हैं।पंचमेश-सप्तमेश-नवमेश तथा लग्नेश का किसी भी प्रकार से परस्पर सम्बन्ध हो रहा हो तो जातक का प्रेम, विवाह में अवश्य ही परिणत होगा हाँ यदि अशुभ ग्रहो का भी सम्बन्ध बन रहा हो तो वैवाहिक समस्या आएगी।लग्नेश-पंचमेश-सप्तमेश- नवमेश तथा द्वादशेश का सम्बन्ध भी अवश्य ही प्रेमी प्रेमिका को वैवाहिक बंधन बाँधने में सफल होता है।प्रेम और विवाह के कारक ग्रह शुक्र या मंगल का पंचम तथा सप्तम भाव-भावेश के साथ सम्बन्ध होना भी विवाह कराने में सक्षम होता है।सभी भावो में नवम भाव की महत्वपूर्ण भूमिका होती है नवम भाव का परोक्ष या अपरोक्ष रूप से सम्बन्ध होने पर माता-पिता का आशीर्वाद मिलता है और यही कारण है की नवम भाव -भावेश का पंचम- सप्तम भाव भावेश से सम्बन्ध बनता है तो विवाह भागकर या गुप्त रूप से न होकर सामाजिक और पारिवारिक रीति-रिवाजो से होती है।शुक्र अगर लग्न स्थान में स्थित है और चन्द्र कुण्डली में शुक्र पंचम भाव में स्थित है तब भी प्रेम विवाह संभव होता है।नवमांश कुण्डली जन्म कुण्डली का सूक्ष्म शरीर माना जाता है अगर कुण्डली में प्रेम विवाह योग नहीं है या आंशिक है और नवमांश कुण्डली में पंचमेश, सप्तमेश और नवमेश की युति होती है तो प्रेम विवाह की संभावना प्रबल हो जाती है।पाप ग्रहो का सप्तम भाव-भावेश से युति हो तो प्रेम विवाह की सम्भावना बन जाती है। राहु और केतु का सम्बन्ध लग्न या सप्तम भाव-भावेश से हो तो प्रेम विवाह का सम्बन्ध बनता है।लग्नेश तथा सप्तमेश का परिवर्तन योग या केवल सप्तमेश का लग्न में होना या लग्नेश का सप्तम में होना भी प्रेम विवाह करा देता है।चन्द्रमा ( जाने ! चन्द्रमा का सप्तम भाव में फल ) तथा शुक्र ( Venus) का लग्न या सप्तम में होना भी प्रेम विवाह की ओर संकेत करता है।उदाहरण कुंडली से प्रेम विवाह के ज्योतिषीय कारण को समझा जा सकता है।जन्म की तारीख- 12 अप्रैल 1985, जन्म का समय- 13:00, जन्म का स्थान– दिल्ली, लिंग- महिलाप्रेम विवाह के ज्योतिषीय सिद्धांत Astrological theory of Love Marriageप्रस्तुत जन्म कुंडली कर्क लग्न की है। इस कुंडली में विवाह भाव सप्तम का स्वामी शनि प्रेम भाव पंचम में चला गया है और वहां से शनि तीसरी दृष्टि से अपने ही घर सप्तम को देख भी रहा है इस प्रकार यहां पंचम और सप्तम भाव से सीधा सम्बन्ध बन रहा है अतः स्पष्ट है कि प्रेम विवाह होगा।लग्नेश चन्द्रमा तथा नवमेश गुरू दोनों की युति सप्तम स्थान में है तथा सप्तमेश शनि भी देख रहा है। इस प्रकार यहाँ लग्न, पंचम, सप्तम तथा नवम का सीधा सम्बन्ध बन रहा है। यही कारण है कि जातक का विवाह प्रेम-विवाह हुआ।नाम- इंदिरा गांधी, जन्म तारीख- 19 नवम्बर 1917, जन्म समय- 22:11:00,जन्म स्थान- ईलाहाबाद, उत्तरप्रदेश प्रेम विवाह के ज्योतिषीय सिद्धांत | Astrological theory of Love Marriage-minप्रस्तुत जन्म कुंडली इंदिरा गांधी(Indira Gandhi) की है। सभी जानते है कि इनका प्रेम-विवाह(Love Marriage) हुआ था। यह कर्क लग्न की कुंडली है। इस कुंडली में विवाह भाव सप्तम का स्वामी शनि की लग्न में युति तथा लग्नेश चन्द्रमा की सप्तम भाव में युति तथा परस्पर सप्तम से दृष्टि देखना प्रेम विवाह के ज्योतिषीय सिद्धांत को पुष्ट करता है।नवमेश गुरु लाभ स्थान में बैठकर पंचम भाव तथा सप्तम भाव एवं लग्नेश को भी देख रहा है। वहीँ वक्री होकर सप्तमेश को भी देख रहा है जो की प्रेम-विवाह के ज्योतिषीय सिद्धांत को 100 प्रतिशत पुष्ट करता है।प्रेम और विवाह के कारक ग्रह शुक्र या मंगल का पंचम तथा सप्तम भाव-भावेश के साथ सम्बन्ध होना भी विवाह कराने में सक्षम होता है।सभी भावो में नवम भाव की महत्वपूर्ण भूमिका होती है नवम भाव का परोक्ष या अपरोक्ष रूप से सम्बन्ध होने पर माता-पिता का आशीर्वाद मिलता है और यही कारण है की नवम भाव -भावेश का पंचम- सप्तम भाव भावेश से सम्बन्ध बनता है तो विवाह भागकर या गुप्त रूप से न होकर सामाजिक और पारिवारिक रीति-रिवाजो से होती है।शुक्र अगर लग्न स्थान में स्थित है और चन्द्र कुण्डली में शुक्र पंचम भाव में स्थित है तब भी प्रेम विवाह संभव होता है।नवमांश कुण्डली जन्म कुण्डली का सूक्ष्म शरीर माना जाता है अगर कुण्डली में प्रेम विवाह योग नहीं है या आंशिक है और नवमांश कुण्डली में पंचमेश, सप्तमेश और नवमेश की युति होती है तो प्रेम विवाह की संभावना प्रबल हो जाती है।पाप ग्रहो का सप्तम भाव-भावेश से युति हो तो प्रेम विवाह की सम्भावना बन जाती है। राहु और केतु का सम्बन्ध लग्न या सप्तम भाव-भावेश से हो तो प्रेम विवाह का सम्बन्ध बनता है।लग्नेश तथा सप्तमेश का परिवर्तन योग या केवल सप्तमेश का लग्न में होना या लग्नेश का सप्तम में होना भी प्रेम विवाह करा देता है।चन्द्रमा ( जाने ! चन्द्रमा का सप्तम भाव में फल ) तथा शुक्र ( Venus) का लग्न या सप्तम में होना भी प्रेम विवाह की ओर संकेत करता है।

*****प्रेम विवाह के ज्योतिषीय सिद्धांत |****** बाल वनिता महिला आश्रम  ज्योतिष में वर्णित प्रेम विवाह के ज्योतिषीय सिद्धांत के द्वारा हम यह जानने में समर्थ होते है कि किसी प्रेमी- प्रेमिका का प्यार विवाह में परिणत होगा या नहीं। वस्तुतः “प्रेमी और प्रेमिका” के मध्य प्रेम की पराकाष्ठा का विवाह में तब्दील होना ही प्रेम विवाह(Love Marriage) है या यूं कहे कि जब लड़का और लड़की में परस्पर प्रेम होता है तदनन्तर जब दोनों एक दूसरे को जीवन साथी के रूप में देखने लगते है और वही प्रेम जब विवाह के रूप में परिणत हो जाता है तो हम उसे प्रेम-विवाह कहते है। प्रेम विवाह हेतु निर्धारित भाव एवं ग्रह वहीं सभी ग्रहो को भी विशेष कारकत्व प्रदान किया गया है। यथा “शुक्र ग्रह” को प्रेम तथा विवाह का कारक माना गया है। स्त्री की कुंडली में “ मगल ग्रह ” प्रेम का कारक माना गया है। ज्योतिषशास्त्र में सभी विषयों के लिए निश्चित भाव निर्धारित किया गया है लग्न, पंचम, सप्तम, नवम, एकादश, तथा द्वादश भाव को प्रेम-विवाह का कारक भाव माना गया है यथा — लग्न भाव — जातक स्वयं। पंचम भाव — प्रेम या प्यार का स्थान। सप्तम...

#केतु_का_उपाय By समाजसेवी वनिता कासनियां पंजाब।।#जिन्दा_मच्छली_कटने_से_बचा_लो।।#नमस्कार_मित्रों।।।#एक्सपेरिमेंटल।।।कुछ दिन पहले एक मित्र जी से उनकी केतु महादशा के बारे में बातचीत हो रही थी।।उनका #चतुर्थ_भाव_में_केतु था।।केतु की महादशा में उनको बहुत परेशानी फेस होने लगी।।एक दिन वो मच्छली खरीदने मच्छली मार्केट में गये थे।।वहाँ कसाई ने पानी में से एक जिन्दा मच्छली निकाली और उसे काटने लगा।।मित्र जी बोले, रुको भाई इसे जिन्दा ही दे दो।।जो पैसे बनते हैं वो ले लो।।कसाई ने तोल के पैसे बताये तो मित्र जी पॉलीथिन के लिफाफे में पानी भर के उस मच्छली को ले आये और नदी में जिन्दा ही छोड़ दिया।।।मित्र जी ने कहीं पढ़ा था कि मच्छली राहु-केतु से सम्बन्धित जीव है।।उस दिन उनके मन में ये विचार आया था कि इस जीव को ना मारना है ना खाना है।।इसलिए वो जिन्दा मच्छली ले आये थे।।।मच्छली को जिन्दा ही नदी में छोड़ दिया और उस दिन के बाद उनको थोड़ा पॉजिटिव फील हुआ।।अगले हफ्ते मूड बनाकर गये कि अब वैसे ही मच्छली खरीदनी है जो जिन्दा हो और कटने वाली हो।बाल वनिता महिला आश्रम।मच्छली मार्केट में सभी मच्छलियाँ कटनी ही हैं,इसलिए कोई भी जिन्दा मच्छली मिल जाएगी।।।इसके बाद हर हफ्ते वो मच्छली मार्केट जाते और एक जिन्दा मच्छली खरीदकर उसे नदी में छोड़ आते।।उनकी प्रॉब्लम्स काफी ज्यादा सॉल्व हुई।।कुछ टाइम बाद कंडीशन्स ऐसी बनी कि मच्छली मार्केट जाने का समय नहीं बचने लगा क्योंकि काम अच्छे से चलने लगा था।।उन्होंने घर में ही मच्छली का #एक्वेरियम रख लिया और 3-4 मच्छलियाँ पाल ली।।उसके बाद केतू की महादशा में उन्हें काफी अच्छे रिजल्ट्स मिलने लगे।।वो पूजा पाठ भी जारी रखते थे, इसलिए पूजा पाठ का भी इफेक्ट पड़ता है।

#केतु_का_उपाय By समाजसेवी वनिता कासनियां पंजाब । । #जिन्दा_मच्छली_कटने_से_बचा_लो। । #नमस्कार_मित्रों। । । #एक्सपेरिमेंटल। । । कुछ दिन पहले एक मित्र जी से उनकी केतु महादशा के बारे में बातचीत हो रही थी। । उनका #चतुर्थ_भाव_में_केतु था। । केतु की महादशा में उनको बहुत परेशानी फेस होने लगी। । एक दिन वो मच्छली खरीदने मच्छली मार्केट में गये थे। । वहाँ कसाई ने पानी में से एक जिन्दा मच्छली निकाली और उसे काटने लगा। । मित्र जी बोले, रुको भाई इसे जिन्दा ही दे दो। । जो पैसे बनते हैं वो ले लो। । कसाई ने तोल के पैसे बताये तो मित्र जी पॉलीथिन के लिफाफे में पानी भर के उस मच्छली को ले आये और नदी में जिन्दा ही छोड़ दिया। । । मित्र जी ने कहीं पढ़ा था कि मच्छली राहु-केतु से सम्बन्धित जीव है। । उस दिन उनके मन में ये विचार आया था कि इस जीव को ना मारना है ना खाना है। । इसलिए वो जिन्दा मच्छली ले आये थे। । । मच्छली को जिन्दा ही नदी में छोड़ दिया और उस दिन के बाद उनको थोड़ा पॉजिटिव फील हुआ। । अगले हफ्ते मूड बनाकर गये कि अब वैसे ही मच्छली खरीदनी है जो जिन्दा हो और कटने वाली हो। बाल वनिता महिला आश्रम । मच्छ...

. * हमारा शुक्र * By समाजसेवी वनिता कासनियां पंजाब* लग्न : व्यक्ति अत्यंत बुद्धिमान होगा, विपरीत लिंगी जातक उसकी ओर आकर्षित होंगे, यह शारीरिक श्रम बिल्कुल नहीं करना चाहेगा, यह उत्तम वक्ता, व स्वभाव से कलात्मक होगा, स्त्रियों से लाभ प्राप्त करेगा, इसके जीवन का उद्देश्य ही ऐश्वर्य भोग है* द्वितीय : द्वितीय स्थान गत शुक्र सर्वोत्तम फल प्रदान करता है, जातक मृदुभाषी, विद्वान, संपत्तिवान व धैर्यवान होगा, पैतृक संपत्ति प्राप्त करेगा, यदि शुक्र बली हो तो सुंदर मुखाकृति, मधुर वाणी व दांत भी सुंदर होते हैं, पीड़ित हो तो असमान दंत पंक्ति, कमजोर दृष्टि व पायरिया भी होता है, कन्या व कुंभ लग्न के लिए द्वितीय का शुक्र वरदान है* तृतीय : शुक्र ललित कलाओं में रुझान देता है, व्यक्ति चित्रकार या मूर्तिकार हो सकता है, उच्च हो तो व्यक्ति अत्यंत धनवान होता है, अन्यथा सामान्य भाग्यशाली होता है, रतिक्रिया मेे जातक की रुचि होती है, मंगल से युत हो तो विकृत सोच देता है, पीड़ित शुक्र आंशिक नपुंसकता दे सकता है ऐसे व्यक्ति पर पत्नी का शासन चलता है* चतुर्थ : चतुर्थ स्थान मेे शुक्र समस्त ऐश्वर्य प्रदान करता है, सुंदर व महंगी कार, महंगे कपड़े, सुंदर घर आदि का उपभोग करता है, ऐसा व्यक्ति प्रन्नचित्त, उत्साही व मनोहर व्यक्तित्व का धनी होता है, शिक्षा बैंकिंग से संबंधित हो सकती है* पंचम : पंचम स्थान मेे बली व शुभ शुक्र कन्या संतति, धन, ऐश्वर्य, सुख, वाक कला, प्रतिष्ठा, व्यावसायिक गुण प्रदान करता है, यदि शुभ चन्द्र से संबंध बनाए तो जातक उद्योगपति तथा सरकार से लाभ प्राप्त करता है* षष्ठ : शुक्र यदि षष्ठ स्थान मेे बली हो तो जातक ज्ञानी, बुद्धिमान, उदार व शुभ कर्मों पर व्यय करने वाला होगा, यदि यह दशमेश से युत हो तो ट्रांसपोर्ट का व्यवसाय करेगा, सूर्य या चन्द्र से युत व अशुभ क्रूर दृष्ट हो तो आंखों मेे समस्या देगा, दंत रोग देगा, मंगल से युत हो तो वाहन दुर्घटना देता है* सप्तम : सप्तम स्थान गत शुक्र जातक को यौनाचार में कुशल एवं बहुधा चरित्रहीन बना देता है, यदि शुक्र सप्तम में मंगल की राशि में हो तो जीवन साथी की आयु कम करता है, यदि शुक्र सप्तम में हो और द्वितीय स्थान को क्रूर ग्रह दृष्ट करें तो जातक को एक से अधिक विवाह देता है* अष्टम : अष्टम स्थान का शुक्र सरकारी नौकरी देता है, व्यक्ति आस्तिक होगा, धन संग्रह करेगा तथा जीवन में सुख साधन संपन्न होगा, जातक यात्रा प्रिय होगा, चछती आंत में विकार दे सकता है, यदि पाप प्रभाव मेे हो तो अशुभ फल करेगा* नवम : नवम स्थान मेे शुक्र अत्यंत शुभ होता है, यह ईश्वर भक्ति व गुरु का आदर दर्शाता है, पत्नी व संतान से सुख प्राप्त करता है* दशम : दशम मेे शुक्र यदि शुभ दृष्ट व उच्च हो तो व्यक्ति उच्च अधिकारी बनता है, ऐसे व्यक्ति शिल्पी, डिजाइनर, इंटीरियर डेकोरेटर, रत्न या सौंदर्य से संबंधित वस्तुओं का निर्माण या विक्रय करता है, इनकी रुचि ट्रांसपोर्टेशन मेे भी होती है* एकादश : भोग विलास का कारक शुक्र यदि एकादश स्थान मेे स्थित हो सभी प्रकार के भौतिक सुख, धन, आनंद, सुविधाएं, नौकर आदि प्रदान करेगा तथा स्वभाव मेे श्रेष्ठता देगा* द्वादश : द्वादश स्थान मेे शुक्र अति शुभ होता है, व्यक्ति धनी होने के साथ साथ अपव्ययी नहीं होता है, द्वादश स्थान मेे मीन राशि गत शुक्र सर्वतोमुखी ऐश्वर्य प्रदान करता है, निर्बल शुक्र नेत्र विकार देता है, व्यवसाय के लिए शुभ नहीं होता है, मंगल से संयोग कामवासना के प्रति विकृत सोच देता है** शुक्र यदि निर्बल व पीड़ित हो तो मां दुर्गा की आराधना से अनुकूलता प्राप्त होती है** यह फलादेश काल पुरुष की कुंडली व कारकत्व पर आधारित है, जरूरी नहीं कि आपकी कुंडली पर सत्य हो

. * हमारा शुक्र * By समाजसेवी वनिता कासनियां पंजाब * लग्न : व्यक्ति अत्यंत बुद्धिमान होगा, विपरीत लिंगी जातक उसकी ओर आकर्षित होंगे, यह शारीरिक श्रम बिल्कुल नहीं करना चाहेगा, यह उत्तम वक्ता, व स्वभाव से कलात्मक होगा, स्त्रियों से लाभ प्राप्त करेगा, इसके जीवन का उद्देश्य ही ऐश्वर्य भोग है * द्वितीय : द्वितीय स्थान गत शुक्र सर्वोत्तम फल प्रदान करता है, जातक मृदुभाषी, विद्वान, संपत्तिवान व धैर्यवान होगा, पैतृक संपत्ति प्राप्त करेगा, यदि शुक्र बली हो तो सुंदर मुखाकृति, मधुर वाणी व दांत भी सुंदर होते हैं, पीड़ित हो तो असमान दंत पंक्ति, कमजोर दृष्टि व पायरिया भी होता है, कन्या व कुंभ लग्न के लिए द्वितीय का शुक्र वरदान है * तृतीय : शुक्र ललित कलाओं में रुझान देता है, व्यक्ति चित्रकार या मूर्तिकार हो सकता है, उच्च हो तो व्यक्ति अत्यंत धनवान होता है, अन्यथा सामान्य भाग्यशाली होता है, रतिक्रिया मेे जातक की रुचि होती है, मंगल से युत हो तो विकृत सोच देता है, पीड़ित शुक्र आंशिक नपुंसकता दे सकता है ऐसे व्यक्ति पर पत्नी का शासन चलता है * चतुर्थ : चतुर्थ स्थान म...