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कोई आधा कटा हुआ नींबू रोज मेरे घर के सामने क्यों फेंकेगा? यह एक दैनिक अभ्यास है और तब से मेरे घर में चीजें ठीक नहीं हैं, मुझे क्या करना चाहिए? By वनिता कासनियां पंजाब मैंने अपने बड़ों से सीखा है कि अगर आपके मन में किसी भी ऐसी चीज़ से डर बैठता है तो हनुमान चालीसा का पाठ करें। हनुमान जी आज भी हमारे आसपास हैं जो जिन्दा भगवान् हैं। उनके सामने शनि, राहु, केतु, भूत प्रेत आदि किसी की नहीं चलती ,अगर दुनिया में इनका अस्तित्व है तो हनुमान जी का भी अस्तित्व है। जहाँ राम का नाम है वहां हनुमान हमेशा हैं।मन में राम का नाम है तो हनुमान जी हर समय साथ हैं और नारायण खुद लक्ष्मी जी के पति हैं तो जहाँ उनका वास हैं वहां लक्ष्मी जी का भी वास है और फिर वहां सुख शांति समृद्धि आने से कोई रोक नहीं सकता।वैसे तो मैं इन चीजों पर विशवास नहीं करती, परन्तु अकसर चौराहों पर कुछ खास दिनों पर ऐसी चीजें पड़ी देखती । काफी लोग विशवास करते हैं।अगर आपके मन में यह वहम है कि किसी के निम्बू फेंकने से आप के घर में चीजें ठीक नहीं हैं, तो पहले तो मान लीजिए इस संसार में कोई भी किसी के लिए अच्छा या बुरा नहीं कर सकता। सब अपने कर्मों का फल भुगते हैं। बल्कि किसी और के लिए बुरा सोचने वाला व्यक्ति अपने ही लिए अहित सोच रहा है। हर किसी को अपनी करनी का फल कई गुना भुगतना पड़ता है। आप सोचिए कोई संतुष्ट, समर्थ, सफल, समृद्ध व्यक्ति बैठे बैठे ही दूसरे का बिगाड़ा करने को क्यों चल देगा जबकी उसका जीवन बढ़िया चल रहा है साफ जाहिर है वह सुखी नहीं है अर्थात वह भी नकारत्मक है तो वह भी अपने जीवन में खुद भी नकारत्मकता को आमंत्रण दे रहा है और बुरा कर रहा है तो भगवान पर उसका न्याय छोड़ दें।हमारी नकारत्मक सोच अपने लिए ही कई गुना नकारत्मक परिस्थितियां बनाती है और नकारत्मकता को अपनी तरफ खींचती है। इससे अपने काम नहीं बनते और भाग्य साथ नहीं देता क्योंकि गरीबी, बीमारी, क्लेश, चोरी चकारी, असफलता सब नकारत्मक चीजें हैं। अपनी नकारत्मक सोच से हमने ही इन्हें अपनी तरफ खींचा है।इसके विपरीत सुख शांति, समृद्वि, उन्नति, प्रगति, पैसा, खुशी, स्वास्थ्य सकारत्मक चीजें हैं और इन्हें हम सकारत्मक सोच से ही अपनी तरफ खींच सकते हैं।जब आप ये मान रहे हैं कि कोई यह कटा निम्बू घर में फेंक कर आपके लिए अशुभता ला रहा है तो आपकी खुद की सोच नकारत्मक है। आप भगवान् की शक्ति पर भरोसा ही नहीं कर रहे हैं। आप ऐसे निम्बू को भगवान् से ज्यादा बलशाली मान रहें हैं और घर की परिस्थितियों का कारण किसी दूसरे को मान रहे हैं।पहले भगवान् पर विशवास करे और देखने का प्रयास करें कि घर में ऐसा क्यों हो सकता है और उन परिस्थितियों को कैसे बदला जा सकता है।आपने तो मान लिया कि परिस्थितियां किसी और की वजह से ऐसी हैं इसलिए उनको ठीक नहीं किया जा सकता। बहुत आसान है दूसरों को अपनी परिस्थितियों के लिए दोषी ठहराना और परिस्थितियों को समझने की कोशिश न करना और उन को वैसे ही छोड़ देना।आप अपनी सोच को बदलें, परिस्थितियां खुद बदल जाएंगीं। खुश रहें जो मिला है उसके लिए भगवान् को धन्यवाद दें।सुबह उठते ही भगवान् को प्रार्थना करें शायद यह प्रार्थना आपके अंदर पाजिटिविटी भर देगी और हमेशा पॉजिटिव रहने में मदद करेगी।🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏हे भगवान, आप का धन्यवाद है कि आप हर पल हर समय हमारे साथ हैं इसलिए हमारे जीवन सुख शांति समृद्धि उन्नति प्रगति सफलता से भरा है। आप हमारे साथ हैं इसलिए हम में असीम शक्ति है असीम शांति है असीम शांति है असीम शांति है। आपका धन्यवाद है आपकी कृपा मुझ पर और मेरे परिवार पर बरस रही है। आपका धन्यवाद है कि आपने हमें हमेशा स्वास्थ्य रहने का वरदान दिया है इसलिए हम हमेशा स्वास्थ्य हैं और आगे भी रहेंगें। आपका धन्यवाद है कि हम अपने हर काम में सफल हैं सफल हैं सफल हैं और हमारे आसपास सभी लोग हमारे शुभचिंतक हैं।राम राम १, राम राम २ , राम राम ३ , राम राम ४ , राम राम ५ , राम राम ६ , राम राम ७ , राम राम ८ , राम राम ९ , राम राम १० , राम राम ११ , राम राम १२ , राम राम १३ , राम राम १४ , राम राम १५ , राम राम १६ , राम राम १७ , राम राम १८ , राम राम १९ , राम राम २० , राम राम २१ 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

मैंने अपने बड़ों से सीखा है कि अगर आपके मन में किसी भी ऐसी चीज़ से डर बैठता है तो हनुमान चालीसा का पाठ करें। हनुमान जी आज भी हमारे आसपास हैं जो जिन्दा भगवान् हैं। उनके सामने शनि, राहु, केतु, भूत प्रेत आदि किसी की नहीं चलती ,अगर दुनिया में इनका अस्तित्व है तो हनुमान जी का भी अस्तित्व है। जहाँ राम का नाम है वहां हनुमान हमेशा हैं।

मन में राम का नाम है तो हनुमान जी हर समय साथ हैं और नारायण खुद लक्ष्मी जी के पति हैं तो जहाँ उनका वास हैं वहां लक्ष्मी जी का भी वास है और फिर वहां सुख शांति समृद्धि आने से कोई रोक नहीं सकता।

वैसे तो मैं इन चीजों पर विशवास नहीं करती, परन्तु अकसर चौराहों पर कुछ खास दिनों पर ऐसी चीजें पड़ी देखती । काफी लोग विशवास करते हैं।

अगर आपके मन में यह वहम है कि किसी के निम्बू फेंकने से आप के घर में चीजें ठीक नहीं हैं, तो पहले तो मान लीजिए इस संसार में कोई भी किसी के लिए अच्छा या बुरा नहीं कर सकता। सब अपने कर्मों का फल भुगते हैं। बल्कि किसी और के लिए बुरा सोचने वाला व्यक्ति अपने ही लिए अहित सोच रहा है। हर किसी को अपनी करनी का फल कई गुना भुगतना पड़ता है। आप सोचिए कोई संतुष्ट, समर्थ, सफल, समृद्ध व्यक्ति बैठे बैठे ही दूसरे का बिगाड़ा करने को क्यों चल देगा जबकी उसका जीवन बढ़िया चल रहा है साफ जाहिर है वह सुखी नहीं है अर्थात वह भी नकारत्मक है तो वह भी अपने जीवन में खुद भी नकारत्मकता को आमंत्रण दे रहा है और बुरा कर रहा है तो भगवान पर उसका न्याय छोड़ दें।

हमारी नकारत्मक सोच अपने लिए ही कई गुना नकारत्मक परिस्थितियां बनाती है और नकारत्मकता को अपनी तरफ खींचती है। इससे अपने काम नहीं बनते और भाग्य साथ नहीं देता क्योंकि गरीबी, बीमारी, क्लेश, चोरी चकारी, असफलता सब नकारत्मक चीजें हैं। अपनी नकारत्मक सोच से हमने ही इन्हें अपनी तरफ खींचा है।

इसके विपरीत सुख शांति, समृद्वि, उन्नति, प्रगति, पैसा, खुशी, स्वास्थ्य सकारत्मक चीजें हैं और इन्हें हम सकारत्मक सोच से ही अपनी तरफ खींच सकते हैं।

जब आप ये मान रहे हैं कि कोई यह कटा निम्बू घर में फेंक कर आपके लिए अशुभता ला रहा है तो आपकी खुद की सोच नकारत्मक है। आप भगवान् की शक्ति पर भरोसा ही नहीं कर रहे हैं। आप ऐसे निम्बू को भगवान् से ज्यादा बलशाली मान रहें हैं और घर की परिस्थितियों का कारण किसी दूसरे को मान रहे हैं।

पहले भगवान् पर विशवास करे और देखने का प्रयास करें कि घर में ऐसा क्यों हो सकता है और उन परिस्थितियों को कैसे बदला जा सकता है।

आपने तो मान लिया कि परिस्थितियां किसी और की वजह से ऐसी हैं इसलिए उनको ठीक नहीं किया जा सकता। बहुत आसान है दूसरों को अपनी परिस्थितियों के लिए दोषी ठहराना और परिस्थितियों को समझने की कोशिश न करना और उन को वैसे ही छोड़ देना।

आप अपनी सोच को बदलें, परिस्थितियां खुद बदल जाएंगीं। खुश रहें जो मिला है उसके लिए भगवान् को धन्यवाद दें।

सुबह उठते ही भगवान् को प्रार्थना करें शायद यह प्रार्थना आपके अंदर पाजिटिविटी भर देगी और हमेशा पॉजिटिव रहने में मदद करेगी।

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हे भगवान, आप का धन्यवाद है कि आप हर पल हर समय हमारे साथ हैं इसलिए हमारे जीवन सुख शांति समृद्धि उन्नति प्रगति सफलता से भरा है। आप हमारे साथ हैं इसलिए हम में असीम शक्ति है असीम शांति है असीम शांति है असीम शांति है। आपका धन्यवाद है आपकी कृपा मुझ पर और मेरे परिवार पर बरस रही है। आपका धन्यवाद है कि आपने हमें हमेशा स्वास्थ्य रहने का वरदान दिया है इसलिए हम हमेशा स्वास्थ्य हैं और आगे भी रहेंगें। आपका धन्यवाद है कि हम अपने हर काम में सफल हैं सफल हैं सफल हैं और हमारे आसपास सभी लोग हमारे शुभचिंतक हैं।

राम राम १, राम राम २ , राम राम ३ , राम राम ४ , राम राम ५ , राम राम ६ , राम राम ७ , राम राम ८ , राम राम ९ , राम राम १० , राम राम ११ , राम राम १२ , राम राम १३ , राम राम १४ , राम राम १५ , राम राम १६ , राम राम १७ , राम राम १८ , राम राम १९ , राम राम २० , राम राम २१ 

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*****प्रेम विवाह के ज्योतिषीय सिद्धांत |******बाल वनिता महिला आश्रम ज्योतिष में वर्णित प्रेम विवाह के ज्योतिषीय सिद्धांत के द्वारा हम यह जानने में समर्थ होते है कि किसी प्रेमी- प्रेमिका का प्यार विवाह में परिणत होगा या नहीं। वस्तुतः “प्रेमी और प्रेमिका” के मध्य प्रेम की पराकाष्ठा का विवाह में तब्दील होना ही प्रेम विवाह(Love Marriage) है या यूं कहे कि जब लड़का और लड़की में परस्पर प्रेम होता है तदनन्तर जब दोनों एक दूसरे को जीवन साथी के रूप में देखने लगते है और वही प्रेम जब विवाह के रूप में परिणत हो जाता है तो हम उसे प्रेम-विवाह कहते है।प्रेम विवाह हेतु निर्धारित भाव एवं ग्रहवहीं सभी ग्रहो को भी विशेष कारकत्व प्रदान किया गया है। यथा “शुक्र ग्रह” को प्रेम तथा विवाह का कारक माना गया है। स्त्री की कुंडली में “ मगल ग्रह ” प्रेम का कारक माना गया है। ज्योतिषशास्त्र में सभी विषयों के लिए निश्चित भाव निर्धारित किया गया है लग्न, पंचम, सप्तम, नवम, एकादश, तथा द्वादश भाव को प्रेम-विवाह का कारक भाव माना गया है यथा —लग्न भाव — जातक स्वयं।पंचम भाव — प्रेम या प्यार का स्थान।सप्तम भाव — विवाह का भाव।नवम भाव — भाग्य स्थान।एकादश भाव — लाभ स्थान।द्वादश भाव — शय्या सुख का स्थान। ******प्रेम विवाह के ज्योतिषीय सिद्धांत या नियम##पंचम और सप्तम भाव तथा भावेश के साथ सम्बन्ध। पंचम भाव प्रेम का भाव है और सप्तम भाव विवाह का अतः जब पंचम भाव का सम्बन्ध सप्तम भाव भावेश से होता है तब प्रेमी-प्रेमिका वैवाहिक सूत्र में बंधते हैं।पंचमेश-सप्तमेश-नवमेश तथा लग्नेश का किसी भी प्रकार से परस्पर सम्बन्ध हो रहा हो तो जातक का प्रेम, विवाह में अवश्य ही परिणत होगा हाँ यदि अशुभ ग्रहो का भी सम्बन्ध बन रहा हो तो वैवाहिक समस्या आएगी।लग्नेश-पंचमेश-सप्तमेश- नवमेश तथा द्वादशेश का सम्बन्ध भी अवश्य ही प्रेमी प्रेमिका को वैवाहिक बंधन बाँधने में सफल होता है।प्रेम और विवाह के कारक ग्रह शुक्र या मंगल का पंचम तथा सप्तम भाव-भावेश के साथ सम्बन्ध होना भी विवाह कराने में सक्षम होता है।सभी भावो में नवम भाव की महत्वपूर्ण भूमिका होती है नवम भाव का परोक्ष या अपरोक्ष रूप से सम्बन्ध होने पर माता-पिता का आशीर्वाद मिलता है और यही कारण है की नवम भाव -भावेश का पंचम- सप्तम भाव भावेश से सम्बन्ध बनता है तो विवाह भागकर या गुप्त रूप से न होकर सामाजिक और पारिवारिक रीति-रिवाजो से होती है।शुक्र अगर लग्न स्थान में स्थित है और चन्द्र कुण्डली में शुक्र पंचम भाव में स्थित है तब भी प्रेम विवाह संभव होता है।नवमांश कुण्डली जन्म कुण्डली का सूक्ष्म शरीर माना जाता है अगर कुण्डली में प्रेम विवाह योग नहीं है या आंशिक है और नवमांश कुण्डली में पंचमेश, सप्तमेश और नवमेश की युति होती है तो प्रेम विवाह की संभावना प्रबल हो जाती है।पाप ग्रहो का सप्तम भाव-भावेश से युति हो तो प्रेम विवाह की सम्भावना बन जाती है। राहु और केतु का सम्बन्ध लग्न या सप्तम भाव-भावेश से हो तो प्रेम विवाह का सम्बन्ध बनता है।लग्नेश तथा सप्तमेश का परिवर्तन योग या केवल सप्तमेश का लग्न में होना या लग्नेश का सप्तम में होना भी प्रेम विवाह करा देता है।चन्द्रमा ( जाने ! चन्द्रमा का सप्तम भाव में फल ) तथा शुक्र ( Venus) का लग्न या सप्तम में होना भी प्रेम विवाह की ओर संकेत करता है।उदाहरण कुंडली से प्रेम विवाह के ज्योतिषीय कारण को समझा जा सकता है।जन्म की तारीख- 12 अप्रैल 1985, जन्म का समय- 13:00, जन्म का स्थान– दिल्ली, लिंग- महिलाप्रेम विवाह के ज्योतिषीय सिद्धांत Astrological theory of Love Marriageप्रस्तुत जन्म कुंडली कर्क लग्न की है। इस कुंडली में विवाह भाव सप्तम का स्वामी शनि प्रेम भाव पंचम में चला गया है और वहां से शनि तीसरी दृष्टि से अपने ही घर सप्तम को देख भी रहा है इस प्रकार यहां पंचम और सप्तम भाव से सीधा सम्बन्ध बन रहा है अतः स्पष्ट है कि प्रेम विवाह होगा।लग्नेश चन्द्रमा तथा नवमेश गुरू दोनों की युति सप्तम स्थान में है तथा सप्तमेश शनि भी देख रहा है। इस प्रकार यहाँ लग्न, पंचम, सप्तम तथा नवम का सीधा सम्बन्ध बन रहा है। यही कारण है कि जातक का विवाह प्रेम-विवाह हुआ।नाम- इंदिरा गांधी, जन्म तारीख- 19 नवम्बर 1917, जन्म समय- 22:11:00,जन्म स्थान- ईलाहाबाद, उत्तरप्रदेश प्रेम विवाह के ज्योतिषीय सिद्धांत | Astrological theory of Love Marriage-minप्रस्तुत जन्म कुंडली इंदिरा गांधी(Indira Gandhi) की है। सभी जानते है कि इनका प्रेम-विवाह(Love Marriage) हुआ था। यह कर्क लग्न की कुंडली है। इस कुंडली में विवाह भाव सप्तम का स्वामी शनि की लग्न में युति तथा लग्नेश चन्द्रमा की सप्तम भाव में युति तथा परस्पर सप्तम से दृष्टि देखना प्रेम विवाह के ज्योतिषीय सिद्धांत को पुष्ट करता है।नवमेश गुरु लाभ स्थान में बैठकर पंचम भाव तथा सप्तम भाव एवं लग्नेश को भी देख रहा है। वहीँ वक्री होकर सप्तमेश को भी देख रहा है जो की प्रेम-विवाह के ज्योतिषीय सिद्धांत को 100 प्रतिशत पुष्ट करता है।प्रेम और विवाह के कारक ग्रह शुक्र या मंगल का पंचम तथा सप्तम भाव-भावेश के साथ सम्बन्ध होना भी विवाह कराने में सक्षम होता है।सभी भावो में नवम भाव की महत्वपूर्ण भूमिका होती है नवम भाव का परोक्ष या अपरोक्ष रूप से सम्बन्ध होने पर माता-पिता का आशीर्वाद मिलता है और यही कारण है की नवम भाव -भावेश का पंचम- सप्तम भाव भावेश से सम्बन्ध बनता है तो विवाह भागकर या गुप्त रूप से न होकर सामाजिक और पारिवारिक रीति-रिवाजो से होती है।शुक्र अगर लग्न स्थान में स्थित है और चन्द्र कुण्डली में शुक्र पंचम भाव में स्थित है तब भी प्रेम विवाह संभव होता है।नवमांश कुण्डली जन्म कुण्डली का सूक्ष्म शरीर माना जाता है अगर कुण्डली में प्रेम विवाह योग नहीं है या आंशिक है और नवमांश कुण्डली में पंचमेश, सप्तमेश और नवमेश की युति होती है तो प्रेम विवाह की संभावना प्रबल हो जाती है।पाप ग्रहो का सप्तम भाव-भावेश से युति हो तो प्रेम विवाह की सम्भावना बन जाती है। राहु और केतु का सम्बन्ध लग्न या सप्तम भाव-भावेश से हो तो प्रेम विवाह का सम्बन्ध बनता है।लग्नेश तथा सप्तमेश का परिवर्तन योग या केवल सप्तमेश का लग्न में होना या लग्नेश का सप्तम में होना भी प्रेम विवाह करा देता है।चन्द्रमा ( जाने ! चन्द्रमा का सप्तम भाव में फल ) तथा शुक्र ( Venus) का लग्न या सप्तम में होना भी प्रेम विवाह की ओर संकेत करता है।

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