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क्या मन और इन्द्रिया दोनों एक ही हैं? By वनिता कासनियां पंजाब इसके दो जवाब है जेसेकबीर जी =क्या देव क्या पैगम्बर क्या कुतुब औलियासब को मन ने दलिया , अर्थात आप मन को किसी कीमत पर नहीं जान सकती हैजो कहे मेने मन को देखा तो वो झूठा क्योंकि न इसका कोई रूप और न रेखा ,दुसरी औरपांच इंद्री =ये informatiim देती है सुख का एहसास इनके द्वारा नही, इनके माध्यम से होता है और उसे अनुभव चेतना करती हैचार अंत करण की इंद्री ,इच्छा/ जिज्ञासा + मेमोरी + इंटेलिजेंस + एक्शनये सब मन है ,इसलिए , एक लाइन होती हैहो सकता है की आप बिना गुरु के मन को काबू या देख पाए या समझ पाए ,दूसरा ,होता है संभव ही नही है बस यही आत्मा है जो भविष्य जानती है ,काम क्रोध लोभ मोह अहंकार ( ego ) इस पर नियंत्रण भेद ज्ञान है इसलिए कबीर जीवो ज्ञान बतला दू ,जिसे ब्रह्मा विष्णु भी नहीं जान पाए अर्थातमाया ही माया है और ये सब बिना सत्य ज्ञान के पार जाने ही नहि देगा अर्थात , आप मन को नहीं जान सकते हैंइसलिए , संतवाणी को पहले ध्यान से समझे , ध्यान आत्मा है और यही( ध्यान/ आत्मा) ही आपको सिर्फ माया के पार ले जा सकती है और दुनिया मे कोई भी इसका साथी नही है और माया के पार जाने के बाद फिर कोई आपका साथी नहीं , क्योंकि आपको परमात्मा समझ आ जाएगा और परमात्मा के बाद कोई माया नही बचती हैइसलिए जीवन का लक्ष्य आपने क्या करना है , दूसरा कोई तो आत्मा को फैक्ट बता सकता है बस ,ThanksThanks Are both the mind and the senses the same? By Vnita Kasnia Punjab It has two answers likeKabir ji =What God, what a prophet, what Qutub AuliyaThe mind has porridge to all, that is, you cannot know the mind at any cost.



इसके दो जवाब है जेसे

कबीर जी =

क्या देव क्या पैगम्बर क्या कुतुब औलिया

सब को मन ने दलिया , अर्थात आप मन को किसी कीमत पर नहीं जान सकती है

जो कहे मेने मन को देखा तो वो झूठा क्योंकि न इसका कोई रूप और न रेखा ,

दुसरी और

पांच इंद्री =ये informatiim देती है सुख का एहसास इनके द्वारा नही, इनके माध्यम से होता है और उसे अनुभव चेतना करती है

चार अंत करण की इंद्री ,

इच्छा/ जिज्ञासा + मेमोरी + इंटेलिजेंस + एक्शन

ये सब मन है ,

इसलिए , एक लाइन होती है

हो सकता है की आप बिना गुरु के मन को काबू या देख पाए या समझ पाए ,

दूसरा ,होता है संभव ही नही है बस यही आत्मा है जो भविष्य जानती है ,

काम क्रोध लोभ मोह अहंकार ( ego ) इस पर नियंत्रण भेद ज्ञान है इसलिए कबीर जी

वो ज्ञान बतला दू ,जिसे ब्रह्मा विष्णु भी नहीं जान पाए अर्थात

माया ही माया है और ये सब बिना सत्य ज्ञान के पार जाने ही नहि देगा अर्थात , आप मन को नहीं जान सकते हैं

इसलिए , संतवाणी को पहले ध्यान से समझे , ध्यान आत्मा है और यही( ध्यान/ आत्मा) ही आपको सिर्फ माया के पार ले जा सकती है और दुनिया मे कोई भी इसका साथी नही है और माया के पार जाने के बाद फिर कोई आपका साथी नहीं , क्योंकि आपको परमात्मा समझ आ जाएगा और परमात्मा के बाद कोई माया नही बचती है

इसलिए जीवन का लक्ष्य आपने क्या करना है , दूसरा कोई तो आत्मा को फैक्ट बता सकता है बस ,

Thanks

Thanks Are both the mind and the senses the same?




By Vnita Kasnia Punjab




It has two answers like


Kabir ji =


What God, what a prophet, what Qutub Auliya


The mind has porridge to all, that is, you cannot know the mind at any cost.


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