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खाने के बाद योगाखाने के बाद गैस और अपच को दूर करने के लिए ट्राई करें ये 4 योगासनआपने कई लोगों से सुना होगा कि खाना खाकर टहलना चाहिए, यह पाचन तंत्र के लिए फायदेमंद होता है। मगर क्या आप जानती हैं कि आप खाने के बाद योग भी कर सकती हैं? चलिये जानते हैं पाचन तंत्र के लिए कुछ योगासन।digestion ke liye yogasanaपीरियड्स में एक्सरसाइज करना आपको दर्द और तनाव से राहत दिला सकता है। चित्र : गुगलBy वनिता कासनियां पंजाब ,बरसात के मौसम में गर्मा गर्म कचौड़ी, समोसे, और पकौड़े खाये बिना मन भरता नहीं है। मगर फिर उसके बाद पेट में गैस, अपच, दर्द और पेट फूलने जैसी समस्याएं होने लगती हैं। तभी आपने अपने बड़े – बुजुर्गों और डॉक्टर्स को यह कहते हुए सुना होगा कि खाना खाकर बैठना- या तुरंत लेटना नहीं चाहिए। खाने को शरीर में पचने के लिए कुछ समय चाहिए होता है।तो पाचन में सुधार करने के लिए कुछ योगासनों के बारे में जानें1. वज्रासनवज्रासन रात के खाने के बाद सबसे अच्छे योगासन में से एक है। यह आसन मुख्य रूप से ऊपरी शरीर और पेट को स्ट्रेच करने पर केंद्रित होता है, जो आपकी श्वास को भी आराम देता है और पाचन में मदद करता है। यह आसन रात के खाने के बाद आसानी से किया जा सकता है, क्योंकि यह पाचन को बढ़ावा देता है।इस योग मुद्रा को करने के लिए आपको अपने दोनों पैरों को मोड़कर अपने नितंबों पर रखना है। और हाथों को घुटनों पर रखें। अपनी पीठ को सीधा रखें और गहरी सांस लें। बस इसी योगासन में कम से कम 10-15 मिनट तक रहें।वज्रासन का नियमित अभ्यास करें। चित्र : शटरस्टॉक2. गोमुखासन (Cow Face Pose)गोमुखासन पाचन में मदद करता है और खाना खाने के बाद आपके पेट का इलाज कर सकता है। यह आपकी रीढ़ और पेट की मांसपेशियों को फ्लेक्स करने में मदद करता है, जिससे पाचन प्रक्रिया आसान हो जाती है।सबसे पहले आपको अपना बायां पैर लेना है और अपने टखने को बाएं नितंब के पास रखना है। फिर अपने दाहिने पैर को लेकर बाएं पैर पर इस तरह रखें कि दोनों पैरों के दोनों घुटने एक दूसरे को छू रहे हों। अपने दोनों हाथों का प्रयोग करें और उन्हें पीछे की ओर रखें ताकि दायां हाथ बाएं हाथ से मिल जाए। याद रखें इसे करते समय अपनी पीठ सीधी रखें। इस योग मुद्रा में कम से कम 30 सेकेंड से 1 मिनट तक रहें।ये आसान पाचन तंत्र के लिए फायदेमंद है। चित्र : शटरस्टॉक3. धनुष मुद्राधनुष मुद्रा आपके पाचन अंगों के कार्य को बढ़ाने में मदद करती है। इस आसान को करने के लिए आप अपने पेट के बल लेट सकते हैं और अपने पैरों को मोड़ लें। वापस छूने की कोशिश करें और अपनी बाहों और हाथों का उपयोग करके टखनों को पकड़ें। अपने शरीर को ऊपर उठाने के बजाय, आप अपनी टखनों को पीछे की ओर रखें। आप अपने कंधों को जितना हो सके खींचें।4. माला मुद्रायदि आप ब्लोटेड और अपच महसूस कर रही हैं तो माला मुद्रा मदद कर सकती है। यह मुद्रा आपके द्वारा खाए गए अतिरिक्त भोजन को हटाने में मदद करती है। अपच से लड़ने के लिए माला मुद्रा एक प्राकृतिक तरीका है।आप अपने पैरों को अपने कंधों जितना चौड़ा रखते हुए स्क्वाट कर सकती हैं। यदि आपकी एड़ी फर्श को नहीं छू रही है, तो इस मुद्रा में उचित संतुलन बनाए रखने और अपने पैरों को सहारा देने के लिए अपनी एड़ी के नीचे एक कंबल रखें। आप अपनी रीढ़ को फैला सकती हैं और गहरी सांस लेती रहें।प्रकृति में गंभीर और ख्‍यालों में आज़ाद। किताबें पढ़ने और कविता लिखने की शौकीन हूं और जीवन के प्रति सकारात्‍मक दृष्टिकोण रखती हूं।

खाने के बाद

 योगा


खाने के बाद गैस और अपच को दूर करने के लिए ट्राई करें ये 4 योगासन

आपने कई लोगों से सुना होगा कि खाना खाकर टहलना चाहिए, यह पाचन तंत्र के लिए फायदेमंद होता है। मगर क्या आप जानती हैं कि आप खाने के बाद योग भी कर सकती हैं? चलिये जानते हैं पाचन तंत्र के लिए कुछ योगासन।
digestion ke liye yogasana
पीरियड्स में एक्सरसाइज करना आपको दर्द और तनाव से राहत दिला सकता है। चित्र : गुगल
By वनिता कासनियां पंजाब 



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बरसात के मौसम में गर्मा गर्म कचौड़ी, समोसे, और पकौड़े खाये बिना मन भरता नहीं है। मगर फिर उसके बाद पेट में गैस, अपच, दर्द और पेट फूलने जैसी समस्याएं होने लगती हैं। तभी आपने अपने बड़े – बुजुर्गों और डॉक्टर्स को यह कहते हुए सुना होगा कि खाना खाकर बैठना- या तुरंत लेटना नहीं चाहिए। खाने को शरीर में पचने के लिए कुछ समय चाहिए होता है।

तो पाचन में सुधार करने के लिए कुछ योगासनों के बारे में जानें

1. वज्रासन

वज्रासन रात के खाने के बाद सबसे अच्छे योगासन में से एक है। यह आसन मुख्य रूप से ऊपरी शरीर और पेट को स्ट्रेच करने पर केंद्रित होता है, जो आपकी श्वास को भी आराम देता है और पाचन में मदद करता है। यह आसन रात के खाने के बाद आसानी से किया जा सकता है, क्योंकि यह पाचन को बढ़ावा देता है।

इस योग मुद्रा को करने के लिए आपको अपने दोनों पैरों को मोड़कर अपने नितंबों पर रखना है। और हाथों को घुटनों पर रखें। अपनी पीठ को सीधा रखें और गहरी सांस लें। बस इसी योगासन में कम से कम 10-15 मिनट तक रहें।

वज्रासन का नियमित अभ्यास करें। चित्र : शटरस्टॉक

2. गोमुखासन (Cow Face Pose)

गोमुखासन पाचन में मदद करता है और खाना खाने के बाद आपके पेट का इलाज कर सकता है। यह आपकी रीढ़ और पेट की मांसपेशियों को फ्लेक्स करने में मदद करता है, जिससे पाचन प्रक्रिया आसान हो जाती है।

सबसे पहले आपको अपना बायां पैर लेना है और अपने टखने को बाएं नितंब के पास रखना है। फिर अपने दाहिने पैर को लेकर बाएं पैर पर इस तरह रखें कि दोनों पैरों के दोनों घुटने एक दूसरे को छू रहे हों। अपने दोनों हाथों का प्रयोग करें और उन्हें पीछे की ओर रखें ताकि दायां हाथ बाएं हाथ से मिल जाए। याद रखें इसे करते समय अपनी पीठ सीधी रखें। इस योग मुद्रा में कम से कम 30 सेकेंड से 1 मिनट तक रहें।

ये आसान पाचन तंत्र के लिए फायदेमंद है। चित्र : शटरस्टॉक

3. धनुष मुद्रा

धनुष मुद्रा आपके पाचन अंगों के कार्य को बढ़ाने में मदद करती है। इस आसान को करने के लिए आप अपने पेट के बल लेट सकते हैं और अपने पैरों को मोड़ लें। वापस छूने की कोशिश करें और अपनी बाहों और हाथों का उपयोग करके टखनों को पकड़ें। अपने शरीर को ऊपर उठाने के बजाय, आप अपनी टखनों को पीछे की ओर रखें। आप अपने कंधों को जितना हो सके खींचें।

4. माला मुद्रा

यदि आप ब्लोटेड और अपच महसूस कर रही हैं तो माला मुद्रा मदद कर सकती है। यह मुद्रा आपके द्वारा खाए गए अतिरिक्त भोजन को हटाने में मदद करती है। अपच से लड़ने के लिए माला मुद्रा एक प्राकृतिक तरीका है।

आप अपने पैरों को अपने कंधों जितना चौड़ा रखते हुए स्क्वाट कर सकती हैं। यदि आपकी एड़ी फर्श को नहीं छू रही है, तो इस मुद्रा में उचित संतुलन बनाए रखने और अपने पैरों को सहारा देने के लिए अपनी एड़ी के नीचे एक कंबल रखें। आप अपनी रीढ़ को फैला सकती हैं और गहरी सांस लेती रहें।प्रकृति में गंभीर और ख्‍यालों में आज़ाद। किताबें पढ़ने और कविता लिखने की शौकीन हूं और जीवन के प्रति सकारात्‍मक दृष्टिकोण रखती हूं।

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*****प्रेम विवाह के ज्योतिषीय सिद्धांत |******बाल वनिता महिला आश्रम ज्योतिष में वर्णित प्रेम विवाह के ज्योतिषीय सिद्धांत के द्वारा हम यह जानने में समर्थ होते है कि किसी प्रेमी- प्रेमिका का प्यार विवाह में परिणत होगा या नहीं। वस्तुतः “प्रेमी और प्रेमिका” के मध्य प्रेम की पराकाष्ठा का विवाह में तब्दील होना ही प्रेम विवाह(Love Marriage) है या यूं कहे कि जब लड़का और लड़की में परस्पर प्रेम होता है तदनन्तर जब दोनों एक दूसरे को जीवन साथी के रूप में देखने लगते है और वही प्रेम जब विवाह के रूप में परिणत हो जाता है तो हम उसे प्रेम-विवाह कहते है।प्रेम विवाह हेतु निर्धारित भाव एवं ग्रहवहीं सभी ग्रहो को भी विशेष कारकत्व प्रदान किया गया है। यथा “शुक्र ग्रह” को प्रेम तथा विवाह का कारक माना गया है। स्त्री की कुंडली में “ मगल ग्रह ” प्रेम का कारक माना गया है। ज्योतिषशास्त्र में सभी विषयों के लिए निश्चित भाव निर्धारित किया गया है लग्न, पंचम, सप्तम, नवम, एकादश, तथा द्वादश भाव को प्रेम-विवाह का कारक भाव माना गया है यथा —लग्न भाव — जातक स्वयं।पंचम भाव — प्रेम या प्यार का स्थान।सप्तम भाव — विवाह का भाव।नवम भाव — भाग्य स्थान।एकादश भाव — लाभ स्थान।द्वादश भाव — शय्या सुख का स्थान। ******प्रेम विवाह के ज्योतिषीय सिद्धांत या नियम##पंचम और सप्तम भाव तथा भावेश के साथ सम्बन्ध। पंचम भाव प्रेम का भाव है और सप्तम भाव विवाह का अतः जब पंचम भाव का सम्बन्ध सप्तम भाव भावेश से होता है तब प्रेमी-प्रेमिका वैवाहिक सूत्र में बंधते हैं।पंचमेश-सप्तमेश-नवमेश तथा लग्नेश का किसी भी प्रकार से परस्पर सम्बन्ध हो रहा हो तो जातक का प्रेम, विवाह में अवश्य ही परिणत होगा हाँ यदि अशुभ ग्रहो का भी सम्बन्ध बन रहा हो तो वैवाहिक समस्या आएगी।लग्नेश-पंचमेश-सप्तमेश- नवमेश तथा द्वादशेश का सम्बन्ध भी अवश्य ही प्रेमी प्रेमिका को वैवाहिक बंधन बाँधने में सफल होता है।प्रेम और विवाह के कारक ग्रह शुक्र या मंगल का पंचम तथा सप्तम भाव-भावेश के साथ सम्बन्ध होना भी विवाह कराने में सक्षम होता है।सभी भावो में नवम भाव की महत्वपूर्ण भूमिका होती है नवम भाव का परोक्ष या अपरोक्ष रूप से सम्बन्ध होने पर माता-पिता का आशीर्वाद मिलता है और यही कारण है की नवम भाव -भावेश का पंचम- सप्तम भाव भावेश से सम्बन्ध बनता है तो विवाह भागकर या गुप्त रूप से न होकर सामाजिक और पारिवारिक रीति-रिवाजो से होती है।शुक्र अगर लग्न स्थान में स्थित है और चन्द्र कुण्डली में शुक्र पंचम भाव में स्थित है तब भी प्रेम विवाह संभव होता है।नवमांश कुण्डली जन्म कुण्डली का सूक्ष्म शरीर माना जाता है अगर कुण्डली में प्रेम विवाह योग नहीं है या आंशिक है और नवमांश कुण्डली में पंचमेश, सप्तमेश और नवमेश की युति होती है तो प्रेम विवाह की संभावना प्रबल हो जाती है।पाप ग्रहो का सप्तम भाव-भावेश से युति हो तो प्रेम विवाह की सम्भावना बन जाती है। राहु और केतु का सम्बन्ध लग्न या सप्तम भाव-भावेश से हो तो प्रेम विवाह का सम्बन्ध बनता है।लग्नेश तथा सप्तमेश का परिवर्तन योग या केवल सप्तमेश का लग्न में होना या लग्नेश का सप्तम में होना भी प्रेम विवाह करा देता है।चन्द्रमा ( जाने ! चन्द्रमा का सप्तम भाव में फल ) तथा शुक्र ( Venus) का लग्न या सप्तम में होना भी प्रेम विवाह की ओर संकेत करता है।उदाहरण कुंडली से प्रेम विवाह के ज्योतिषीय कारण को समझा जा सकता है।जन्म की तारीख- 12 अप्रैल 1985, जन्म का समय- 13:00, जन्म का स्थान– दिल्ली, लिंग- महिलाप्रेम विवाह के ज्योतिषीय सिद्धांत Astrological theory of Love Marriageप्रस्तुत जन्म कुंडली कर्क लग्न की है। इस कुंडली में विवाह भाव सप्तम का स्वामी शनि प्रेम भाव पंचम में चला गया है और वहां से शनि तीसरी दृष्टि से अपने ही घर सप्तम को देख भी रहा है इस प्रकार यहां पंचम और सप्तम भाव से सीधा सम्बन्ध बन रहा है अतः स्पष्ट है कि प्रेम विवाह होगा।लग्नेश चन्द्रमा तथा नवमेश गुरू दोनों की युति सप्तम स्थान में है तथा सप्तमेश शनि भी देख रहा है। इस प्रकार यहाँ लग्न, पंचम, सप्तम तथा नवम का सीधा सम्बन्ध बन रहा है। यही कारण है कि जातक का विवाह प्रेम-विवाह हुआ।नाम- इंदिरा गांधी, जन्म तारीख- 19 नवम्बर 1917, जन्म समय- 22:11:00,जन्म स्थान- ईलाहाबाद, उत्तरप्रदेश प्रेम विवाह के ज्योतिषीय सिद्धांत | Astrological theory of Love Marriage-minप्रस्तुत जन्म कुंडली इंदिरा गांधी(Indira Gandhi) की है। सभी जानते है कि इनका प्रेम-विवाह(Love Marriage) हुआ था। यह कर्क लग्न की कुंडली है। इस कुंडली में विवाह भाव सप्तम का स्वामी शनि की लग्न में युति तथा लग्नेश चन्द्रमा की सप्तम भाव में युति तथा परस्पर सप्तम से दृष्टि देखना प्रेम विवाह के ज्योतिषीय सिद्धांत को पुष्ट करता है।नवमेश गुरु लाभ स्थान में बैठकर पंचम भाव तथा सप्तम भाव एवं लग्नेश को भी देख रहा है। वहीँ वक्री होकर सप्तमेश को भी देख रहा है जो की प्रेम-विवाह के ज्योतिषीय सिद्धांत को 100 प्रतिशत पुष्ट करता है।प्रेम और विवाह के कारक ग्रह शुक्र या मंगल का पंचम तथा सप्तम भाव-भावेश के साथ सम्बन्ध होना भी विवाह कराने में सक्षम होता है।सभी भावो में नवम भाव की महत्वपूर्ण भूमिका होती है नवम भाव का परोक्ष या अपरोक्ष रूप से सम्बन्ध होने पर माता-पिता का आशीर्वाद मिलता है और यही कारण है की नवम भाव -भावेश का पंचम- सप्तम भाव भावेश से सम्बन्ध बनता है तो विवाह भागकर या गुप्त रूप से न होकर सामाजिक और पारिवारिक रीति-रिवाजो से होती है।शुक्र अगर लग्न स्थान में स्थित है और चन्द्र कुण्डली में शुक्र पंचम भाव में स्थित है तब भी प्रेम विवाह संभव होता है।नवमांश कुण्डली जन्म कुण्डली का सूक्ष्म शरीर माना जाता है अगर कुण्डली में प्रेम विवाह योग नहीं है या आंशिक है और नवमांश कुण्डली में पंचमेश, सप्तमेश और नवमेश की युति होती है तो प्रेम विवाह की संभावना प्रबल हो जाती है।पाप ग्रहो का सप्तम भाव-भावेश से युति हो तो प्रेम विवाह की सम्भावना बन जाती है। राहु और केतु का सम्बन्ध लग्न या सप्तम भाव-भावेश से हो तो प्रेम विवाह का सम्बन्ध बनता है।लग्नेश तथा सप्तमेश का परिवर्तन योग या केवल सप्तमेश का लग्न में होना या लग्नेश का सप्तम में होना भी प्रेम विवाह करा देता है।चन्द्रमा ( जाने ! चन्द्रमा का सप्तम भाव में फल ) तथा शुक्र ( Venus) का लग्न या सप्तम में होना भी प्रेम विवाह की ओर संकेत करता है।

*****प्रेम विवाह के ज्योतिषीय सिद्धांत |****** बाल वनिता महिला आश्रम  ज्योतिष में वर्णित प्रेम विवाह के ज्योतिषीय सिद्धांत के द्वारा हम यह जानने में समर्थ होते है कि किसी प्रेमी- प्रेमिका का प्यार विवाह में परिणत होगा या नहीं। वस्तुतः “प्रेमी और प्रेमिका” के मध्य प्रेम की पराकाष्ठा का विवाह में तब्दील होना ही प्रेम विवाह(Love Marriage) है या यूं कहे कि जब लड़का और लड़की में परस्पर प्रेम होता है तदनन्तर जब दोनों एक दूसरे को जीवन साथी के रूप में देखने लगते है और वही प्रेम जब विवाह के रूप में परिणत हो जाता है तो हम उसे प्रेम-विवाह कहते है। प्रेम विवाह हेतु निर्धारित भाव एवं ग्रह वहीं सभी ग्रहो को भी विशेष कारकत्व प्रदान किया गया है। यथा “शुक्र ग्रह” को प्रेम तथा विवाह का कारक माना गया है। स्त्री की कुंडली में “ मगल ग्रह ” प्रेम का कारक माना गया है। ज्योतिषशास्त्र में सभी विषयों के लिए निश्चित भाव निर्धारित किया गया है लग्न, पंचम, सप्तम, नवम, एकादश, तथा द्वादश भाव को प्रेम-विवाह का कारक भाव माना गया है यथा — लग्न भाव — जातक स्वयं। पंचम भाव — प्रेम या प्यार का स्थान। सप्तम...

मनो वैज्ञानिक तथ्य क्या हैं जो लोग नहीं जानते हैं? By वनिता कासनियां पंजाब नफरत करने वाले आपसे वास्तव में नफरत नहीं करते हैं, वास्तव में वे खुद से नफरत करते हैं क्योंकि आप जो चाहते हैं उसका प्रतिबिंब हैं।2. एक व्यक्ति दूसरे लोगों के बारे में आपसे कैसे बात करता है, इसे ध्यान से सुनना सुनिश्चित करें। इस तरह वे आपके बारे में दूसरे लोगों से बात करते हैं।3. हमें केवल दो करीबी दोस्त चाहिए जिन पर हम भरोसा कर सकें। बहुत सारे दोस्त अवसाद और तनाव से जुड़े हुए हैं।4. जो लोग ज्यादा मेलजोल नहीं करते वे असल में असामाजिक नहीं होते, उनमें ड्रामा और नकली लोगों को बर्दाश्त नहीं होता।5. अपनी समस्याओं को दूसरों को बताना बंद करें, 20% परवाह नहीं है और अन्य 80% खुश हैं कि आपके पास यह है।6. पढ़ाई के दौरान चॉकलेट खाने से मस्तिष्क को नई जानकारी बनाए रखने में मदद मिलती है और यह उच्च परीक्षण स्कोर से जुड़ा होता है।7. जिसे आप नापसंद करते हैं उसके साथ अच्छा होने का मतलब यह नहीं है कि आप नकली हैं, इसका आम तौर पर मतलब है कि आप उस व्यक्ति को सहन करने के लिए पर्याप्त परिपक्व हैं।8. किसी को अपने दिमाग से निकालना मुश्किल है, इसका कारण यह है कि वे आपके बारे में भी सोच रहे हैं।9. जो लोग कटाक्ष को अच्छी तरह समझते हैं वे अक्सर लोगों के मन को पढ़ने में अच्छे होते हैं।10. यदि आपका मन बार-बार भटकता है, तो 85% संभावना है कि आप अवचेतन रूप से अपने जीवन से नाखुश हैं।11. माता-पिता अपने बच्चों से जिस तरह से बात करते हैं, वह उनकी अंतरात्मा की आवाज बन जाती है।12. अपने नकारात्मक विचारों को लिखना और उन्हें कूड़ेदान में फेंक देना आपके मूड को बेहतर बना सकता है। (मैंने कोशिश की और यह वास्तव में काम करता है :)13. ध्यान मात्र 8 सप्ताह में मस्तिष्क की संरचना को बदल सकता है। यह सीखने से जुड़े मस्तिष्क के कुछ हिस्सों में ग्रे मैटर को भी बढ़ाता है।मनोविज्ञान कहता है कि जो लोग अच्छी सामग्री लिखते हैं और अपने उत्तरों में स्क्रीनशॉट पोस्ट नहीं करते हैं, उन्हें कम व्यू और कम अपवोट मिलते हैं

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